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मिर्गी क्या है ?

मिर्गी एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें मरीज के दिमाग में असामान्य तरंगें पैदा होने लगती हैं। मस्तिष्क में गड़बड़ी होने के कारण व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ने लगते हैं। जिसकी वजह से व्यक्ति का दिमागी संतुलन पूरी तरह से गड़बड़ा जाता है और उसका शरीर लड़खड़ाने लगता है।

दौरे के संभावित कारण
अगर थकावट महसूस हो तो ज्यादा नींद ले सकते हैं। साथ ही हार्मोन में गड़बड़ी, जलती-बुझती तेज रोशनी, नशीली दवाएं लेना, शराब पीना या दूसरे प्रकार का नशा करना, मिर्गी रोगी द्वारा दवाएं अचानक बंद कर देना, कुछ मरीजों में भावनात्मक तनाव और छोटे बच्चों में बुखार भी कारण हो सकते हैं।
मिर्गी आने पर क्या करें?
रोजाना तुलसी के 20 पत्ते चबाकर खाने से रोग की गंभीरता में गिरावट देखी जाती है। मिर्गी की बीमारी से राहत पाने के लिए एक नीबू पर थोड़ा-सा हींग का पाउडर छिड़ककर इसे चूसें। नीबू में हींग पाउडर या गोरखमुंडी मिलाकर रोजाना चूसने से कुछ ही दिनों में मिर्गी के दौरे आने बंद हो जाएंगे। अंगूर का रस प्रात:काल खाली पेट लेना चाहिए।
फोकल शुरुआत –
-मस्तिष्क के एक तरफ से उत्पत्ति
-व्यक्ति पूरी तरह से होश में होता है जागृत-फोकल शुरुआत
-व्यक्ति बेहोश हो जाता है- फोकल शुरुआत बिगड़ा जागरूकता / जटिल आंशिक दौरे


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